सिय-पिय मिलन महोत्सव : राममय हुई आध्यात्मिक नगरी में दूर-दराज से पहुंच रहे संत-महात्मा व श्रद्धालु

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सिय-पिय मिलन महोत्सव : राममय हुई आध्यात्मिक नगरी में दूर-दराज से पहुंच रहे संत-महात्मा व श्रद्धालु

दिखाया जाता है कि अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां श्री राम अपने अंशों सहित अवतरित होते हैं, फिर गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों का नामकरण संस्कार किया जाता है. इसी क्रम में व्यास पीठ पर बैठे आचार्य के छंदों को सुनकर श्रद्धालु खुशी से झूमने लगते हैं और पूरा लीला परिसर जय श्रीराम, जय श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो जाता है.

नया बाजार में जारी है श्री सीताराम विवाह महोत्सव

रासलीला तथा रामलीला का आयोजन देख मंत्रमुग्ध हो जा रहे लोग

बक्सर : अध्यात्म की नगरी में सीता राम विवाह के मनमोहक दृश्यों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दे रही है. हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन राम रस का पान खुद को धन्य कर रहे हैं. हजारों ऋषि-महात्माओं की तपोस्थली रहा बक्सर इस महान धार्मिक आयोजन के साथ ही बनकर आनंद उसके सागर में गोते लगा रहे हैं. सुबह से ही कार्यक्रम शुरु हो रहे हैं जिसमें सर्वप्रथम सुबह नावाह पारायण का पाठ हो रहा है, तत्पश्चात 9:00 बजे से रासलीला फिर अवध धाम से पधारे श्रीमद् वाल्मीकिय रामायण कथा मर्मज्ञ राघवाचार्य महाराज का प्रवचन एवं संध्या कालीन बेला में देश के कोने-कोने से आए संत महात्माओं की अमृतवाणी का आनंद ले कर अपने लोक परलोक को सुधार रहे हैं. वही रात्रि 9:00 बजे से देर रात तक रामलीला का भव्य आयोजन हो रहा है.

लगातार पहुंच रहे हैं संत महात्मा आज आएंगे मलूक पीठाधीश्वर :

आयोजन के तीसरे दिन भी दूरदराज से साधु संतों के आगमन का सिलसिला जारी रहा बेंगलुरु से अशोक जी दरभंगा से दिगंबर झा, टाटानगर से सुरेंद्र झा, वृंदावन से रामदास जी एवं यदु शरण उर्फ बाबू बाबा गोवर्धन बक्सर पधार चुके हैं वहीं, अयोध्या से लक्ष्मण किलाधीश श्री मैथिली शरण जी महाराज रविवार को तथा वृंदावन से मलूक पीठाधीश्वर जगतगुरु देवाचार्य जी महाराज शनिवार को पधार रहे हैं. आश्रम के महंत राजा राम सरण दास जी महाराज ने बताया कि संतों का समागम जारी है. पुष्प वाटिका कार्यक्रम तक श्री शंकराचार्य समेत कई अन्य जनों के आगमन की संभावना है.

गोपाल की भक्ति देख भाव-विभोर हुए दर्शक :

तीसरे दिन की रासलीला पसंद में गोपाल भक्त लीला से प्रभु श्री कृष्ण के जीवन कृत्य का अवलोकन श्रद्धालु करते हैं. शुरुआत श्री कृष्ण की सखियों के आरती के द्वारा होती है. लीला प्रसंग में दिखाया जाता है कि गोपाल नाम का किसान संतो के पास सत्संग सुनने जाता है, फिर किसान के मन में यह विचार आता है कि सत्संग के बिना जीवन अधूरा है और वह संतों की सेवा में लग जाता है. संत उन्हें गौ सेवा का कार्य देते हैं. इसी क्रम में भगवान उन्हें दर्शन देते हैं. भगवान की झांकी को देखकर मौके पर मौजूद लोग भाव विभोर हो जाते हैं.

 

अयोध्या में रामलला का हुआ जन्म

रात्रि काल में रामलीला के दौरान श्री राम के जन्म का प्रसंग दिखाया जाता है. “भए प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी” के पद गायन के साथ लीला का मंचन शुरू होता है, जिसमें दिखाया जाता है कि अयोध्या में महाराज दशरथ के यहां श्री राम अपने अंशों सहित अवतरित होते हैं, फिर गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों का नामकरण संस्कार किया जाता है. इसी क्रम में व्यास पीठ पर बैठे आचार्य के छंदों को सुनकर श्रद्धालु खुशी से झूमने लगते हैं और पूरा लीला परिसर जय श्रीराम, जय श्रीराम के जयकारों से गुंजायमान हो जाता है.

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