गंगा, पर्यावरण और संस्कृति का संरक्षण संर्वधन एवं हमारे देश के विकास का मार्ग है-राजेश शुक्ला

दशाश्वमेध घाट पर गंगा तलहटी की सफाई कर गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा की पवित्रता, निर्मलता और अविरलता सदैव जीवन में मार्गदर्शन और प्रेरणा के स्रोत रहे हैं । मां गंगा का देश के सामाजिक सद्भाव में भी महत्वपूर्ण स्थान है । गंगा से कोई एक समुदाय या संप्रदाय विशेष का जुड़ाव नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्ग के लोग किसी न किसी रूप में गंगा से अपना जुड़ाव देखते हैं । गंगा भारतीय संस्कृति की संवाहिका है। गंगा के प्रति अनुराग देश में ही नहीं विदेश में भी दिखता है । इसलिए गंगा की स्वच्छता जरूरी है । इसी में पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य भी जुड़ा है । घाटों की सफाई से न सिर्फ गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है बल्कि स्वच्छ और सुंदर घाट पर्यटकों को भी लुभाते हैं। गंगा को निर्मल, स्वच्छ और अविरल बनाना केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि सभी देशवासियों का है । भारत के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ और निर्मल गंगा तथा पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देना होगा ।